जशपुर के ‘पंचक्की’ केंद्र ने बदली आदिवासियों की तकदीर: साल भर में कमाए 23 लाख से अधिक, जड़ी-बूटियों से महकी किस्मत

जशपुर। कभी जंगलों से जड़ी-बूटियां इकट्ठा कर उन्हें कौड़ियों के दाम बेचने वाले हाथ आज मशीनों और तकनीक के जरिए च्यवनप्राश और आरोग्य अमृत तैयार कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित वन धन विकास केंद्र (VDVK) पंचक्की जनजातीय सशक्तिकरण का एक जीवंत मॉडल बनकर उभरा है। यहाँ के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने न केवल अपनी गरीबी को मात दी है, बल्कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 23.16 लाख रुपये की शानदार बिक्री दर्ज कर सबको हैरान कर दिया है।

​मजदूरी से ‘मार्केटिंग’ तक का सफर

​जशपुर की उरांव जनजाति के परिवारों के लिए जीवन कभी सिर्फ खेती और दिहाड़ी मजदूरी के इर्द-गिर्द घूमता था। लेकिन प्रधानमंत्री जनजातीय वन धन विकास योजना (PMJVM) ने उनकी तकदीर बदल दी। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ (CGMFED) और ट्राइफेड (TRIFED) के तकनीकी सहयोग से इन ग्रामीणों को लघु वनोपज के मूल्यवर्धन (Value Addition) का प्रशिक्षण दिया गया।

​आज ये समूह जंगलों से मिलने वाली दुर्लभ औषधियों से च्यवनप्राश, वासावलेह, कौंचपाक और आरोग्य अमृत जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

​’छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के नाम से मिली पहचान

​इन समूहों की सफलता का राज उनकी गुणवत्ता और ब्रांडिंग में छिपा है।

  • ब्रांडिंग: इनके उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बेचे जा रहे हैं।
  • बाजार: बिक्री के लिए ‘संजीवनी’ आउटलेट्स का नेटवर्क उपलब्ध कराया गया है।
  • विश्वसनीयता: उत्पादों की शुद्धता के लिए आयुष विभाग से बाकायदा लाइसेंस प्राप्त किया गया है, जिससे बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है।

​आंकड़ों में सफलता की कहानी

​पंचक्की केंद्र की प्रगति निरंतर बनी हुई है। पिछले पाँच वर्षों का औसत देखा जाए तो इन समूहों ने 31.9 लाख रुपये की औसत वार्षिक बिक्री का कीर्तिमान स्थापित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनरी और सही मार्केटिंग ने इन आदिवासियों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर सीधे बाजार से जोड़ दिया है।

​जीवन में आया बड़ा बदलाव

​आर्थिक मजबूती का असर अब इन परिवारों के सामाजिक जीवन पर भी दिख रहा है। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करने में सक्षम हैं।

​”यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि हमारी पहचान है। पहले हम कच्चा माल बेचते थे, आज हम खुद उत्पादक हैं।” — समूह की एक महिला सदस्य

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