जशपुर। जंगलों की शांत गहराइयों में छिपी प्रकृति की कहानियों को जब एक संवेदनशील नजरिया मिलता है, तो वह केवल तस्वीर नहीं, बल्कि संरक्षण का आंदोलन बन जाती है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इसी विजन के साथ काम कर रहे हैं युवा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अश्विनी चौहान। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर अश्विनी का यह सफर न केवल युवाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि जशपुर की प्राकृतिक विरासत को भी मुख्यधारा में ला रहा है।
अश्विनी चौहान लंबे समय से जशपुर के सघन वनों, पठारों और घाटियों में पाए जाने वाले दुर्लभ पक्षियों, तितलियों और वन्यजीवों के दस्तावेजीकरण (Documentation) में जुटे हैं। उनके लेंस का फोकस केवल खूबसूरत फ्रेम तैयार करना नहीं, बल्कि हर जीव के अस्तित्व और पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी भूमिका को दर्ज करना है।


बर्डवॉचिंग और तितलियों के अध्ययन को बनाया मिशन अश्विनी की मुख्य विशेषज्ञता बर्ड फोटोग्राफी, बटरफ्लाई फोटोग्राफी और वाइल्डलाइफ डॉक्यूमेंटेशन में है। वे दुर्गम प्राकृतिक इलाकों में घंटों समय बिताकर न सिर्फ तस्वीरें खींचते हैं, बल्कि प्रजातियों की वैज्ञानिक पहचान और व्यवहार का गहन अध्ययन भी करते हैं। उनका मानना है कि जशपुर की जैव विविधता मध्य भारत के सबसे समृद्ध और अनछुए हिस्सों में से एक है।
“वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी मेरे लिए सिर्फ एक तस्वीर क्लिक करना नहीं है। जंगल के हर जीव की अपनी एक दास्तान है। मेरा प्रयास है कि कैमरे के जरिए उन कहानियों को समाज तक पहुंचाऊं ताकि लोग प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें।” — अश्विनी चौहान


‘वाइल्ड जशपुर’ को वैश्विक पटल पर लाने का संकल्प अश्विनी का मुख्य लक्ष्य जिले को “Wild Jashpur” के रूप में स्थापित करना है। उनका विजन है कि लोग जशपुर को केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों के लिए न जानें, बल्कि इसे बर्डवॉचिंग, नेचर ट्रेल्स और तितलियों की अनूठी दुनिया के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचानें। वे स्थानीय युवाओं को भी नेचर टूरिज्म और बर्ड स्टडी से जोड़ने की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं।
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर अपनी सोच साझा करते हुए अश्विनी चौहान कहते हैं:
“एक तस्वीर केवल किसी जीव का रूप नहीं दिखाती, बल्कि उसके संरक्षण की आवश्यकता का अहसास कराती है। मेरा कैमरा जशपुर की प्रकृति की आवाज बनने का एक विनम्र प्रयास है।”
अश्विनी चौहान की यह निरंतर साधना साबित करती है कि यदि हुनर के साथ समर्पण और पर्यावरण के प्रति निष्ठा जुड़ जाए, तो एक अकेला फोटोग्राफर भी पूरे अंचल की जैव विविधता का संरक्षक और संवाहक बन सकता है।