अंबिकापुर / रायपुर:
सीमित आमदनी और रोजमर्रा के खर्चों के बीच पक्के आशियाने का सपना वर्षों तक अधूरा रह जाता है, लेकिन सरकारी योजनाओं की सही पहुंच इस तस्वीर को पूरी तरह बदल देती है। ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ के तहत ऐसी ही एक बदलाव की कहानी सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित घुटरापारा से सामने आई है, जहां ठेला लगाकर परिवार पालने वाले दंपति के पक्के घर का सपना अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से हकीकत बन चुका है।
श्रीमती स्नेहलता गुप्ता के पांच सदस्यीय परिवार के लिए यह पक्की छत महज ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन की गारंटी बन गई है।
ठेले की सीमित कमाई में पक्का मकान था नामुमकिन
स्नेहलता गुप्ता के परिवार में पति-पत्नी और तीन बच्चे हैं। परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया पति द्वारा लगाया जाने वाला ठेला है। दिनभर की मेहनत-मजदूरी से केवल बच्चों की पढ़ाई, भोजन और दैनिक जरूरतें ही पूरी हो पाती थीं। ऐसे में एकमुश्त पूंजी जुटाकर पक्का मकान बनवाना इस परिवार के लिए नामुमकिन जैसा था।
पहले का जीवन बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित था। घर में न तो व्यवस्थित शौचालय था और न ही स्नानघर। रोजमर्रा की इन दिक्कतों से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ती थी।
पीएम आवास योजना (शहरी) से मिली वित्तीय मदद
स्नेहलता ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवेदन किया, जिसके बाद उनके आवेदन को स्वीकृति मिली और किस्तवार वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में पहुंची। आर्थिक मदद मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हुआ और आज परिवार के सिर पर सुरक्षित और पक्की छत खड़ी है।
स्नेहलता गुप्ता का कहना है:
“सीमित कमाई में बच्चों का पेट भरना ही सबसे बड़ा काम था, मकान की बात तो सोचना भी दूर था। शौचालय और नहाने तक की जगह नहीं होने से बहुत जिल्लत झेलनी पड़ती थी। अब पक्का घर मिलने से बच्चों को एक सुरक्षित माहौल मिला है। इस मदद के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आभारी हैं।”
अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही राहत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक आवास योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पहुंचाना है। ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ यह रेखांकित करता है कि प्रशासनिक मदद जब सीधे जमीन पर उतरती है, तो वह ठेला चलाने वाले सबसे कमजोर तबके के जीवन में भी बड़ा और स्थायी सामाजिक बदलाव लाती है।
