रायपुर (15 अक्टूबर): हुनर को जब सही मंच और वित्तीय सहारा मिलता है, तो वह आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख देता है। कोरिया जिले के ग्राम कटोरा की संतोषी प्रजापति ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर संतोषी ने न केवल अपने पारंपरिक मूर्तिकला के हुनर को नया जीवन दिया, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का जरिया भी तैयार किया।
समूह से ₹5 लाख का ऋण लेकर किया कारोबार का विस्तार
संतोषी प्रजापति वर्ष 2019 में बिहान के तहत गठित ‘मां ज्वाला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी थीं। शुरुआत में सीमित पूंजी के कारण वे बड़े स्तर पर काम नहीं कर पा रही थीं, लेकिन समूह से मिलने वाले वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन ने उनकी राह आसान कर दी। समूह के माध्यम से ₹5 लाख का ऋण लेकर उन्होंने कच्चा माल, सांचे और अन्य जरूरी संसाधन जुटाए और मूर्ति निर्माण के व्यवसाय का दायरा बढ़ाया।
पूरा परिवार मिलकर करता है काम, साल भर बनी रहती है आमदनी
संतोषी के इस काम में उनका पूरा परिवार हाथ बंटाता है। उनके पति धनेश्वर प्रसाद, दोनों देवर और देवरानी मिलकर मूर्तियों को आकार देने, रंगाई करने और फिनिशिंग का काम करते हैं। तीज-त्योहारों से लेकर आम दिनों में भी विभिन्न देवी-देवताओं व कलाकृतियों की मांग बनी रहने से परिवार को साल भर नियमित और बेहतर मुनाफा मिल रहा है।
संतोषी प्रजापति बताती हैं कि बिहान योजना ने उन्हें सिर्फ पैसे की मदद नहीं दी, बल्कि उनके हुनर को सही पहचान और बाजार तक पहुंच दिलाई है। इसके लिए वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहती हैं कि शासन की इस व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका मिल रही है।
