छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती और पहाड़ी जिला जशपुर आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की साझा पहल “आरोग्य जशपुर अभियान” ने सुदूर वनांचल के गांवों तक चिकित्सा सेवाओं को न केवल पहुँचाया है, बल्कि उसे आधुनिक और हाईटेक भी बनाया है। कलेक्टर श्री रोहित व्यास की नियमित समीक्षा और स्वास्थ्य विभाग के रोडमैप का नतीजा है कि आज जिले के आखिरी छोर पर बैठा व्यक्ति भी खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है।
एक कॉल पर सक्रिय होती है ‘स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन’
अभियान की सबसे बड़ी ताकत 07763-299030 हेल्पलाइन नंबर है। ओला-उबर की तर्ज पर एम्बुलेंस ट्रैकिंग की सुविधा देने वाला यह सिस्टम 5 मिनट के भीतर रिस्पांस देता है। अब तक 3100 से अधिक लोगों ने इस सेवा का लाभ उठाया है, जिसमें पारदर्शिता के साथ-साथ मरीजों का फॉलोअप भी लिया जाता है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए ‘पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्क’
बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित हेल्पडेस्क आदिवासी समाज की महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। स्थानीय भाषा में संवाद होने के कारण पीवीटीजी (PVTG) समुदाय के लोगों में झिझक कम हुई है। इसका परिणाम यह है कि अब तक 1450 से अधिक मरीजों ने ओपीडी और 900 से अधिक ने आईपीडी सेवाओं का लाभ लिया है।
सर्पदंश और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
जशपुर जैसे जिले में सर्पदंश एक बड़ी चुनौती है। आरोग्य अभियान के तहत अब गूगल शीट और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए केस-टू-केस मॉनिटरिंग की जा रही है। 626 मामलों में से 616 लोगों की जान बचाना इस अभियान की बड़ी सफलता है। वहीं, ‘स्वस्थ महतारी सबकी जिम्मेदारी’ के तहत 44,000 से अधिक कॉल्स के जरिए गर्भवती महिलाओं और नवजातों की निगरानी की जा रही है।
डिजिटल डैशबोर्ड और अधोसंरचना का विस्तार
रक्त की उपलब्धता के लिए एनआईसी पोर्टल पर रियल टाइम डैशबोर्ड बनाया गया है, ताकि आपात स्थिति में भटकना न पड़े। साथ ही, कुनकुरी में 220 बिस्तरों का अस्पताल, नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक और नर्सिंग कॉलेज जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स जिले के स्वास्थ्य ढांचे को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज इस अभियान की सफलता में एक और मील का पत्थर साबित होगा।
आरोग्य जशपुर अभियान आज राज्य के अन्य जिलों के लिए भी नवाचार और समर्पण का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है।
