नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की नई अलख: विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई के लिए सरकार ने दिए 2.40 करोड़, युवाओं को मिलेगा शिक्षक बनने का मौका

रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य शासन ने चालू वित्तीय वर्ष में ‘आर्यभट्ट विज्ञान-वाणिज्य शिक्षण प्रोत्साहन योजना’ (Aryabhatta Science-Commerce Education Promotion Scheme) के लिए 2 करोड़ 40 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया है।इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के विद्यार्थियों में विज्ञान और वाणिज्य विषयों के प्रति रुचि बढ़ाना और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है।दुर्ग और जगदलपुर में 500-500 सीटर केंद्र स्थापितआदिम जाति विकास विभाग के अनुसार, इस योजना के सुचारू संचालन के लिए दुर्ग और जगदलपुर में 500-500 सीटर क्षमता वाले विशेष शिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं।बालक केंद्र: जगदलपुर में संचालित है।कन्या केंद्र: दुर्ग में संचालित है।इन केंद्रों के माध्यम से सुदूर अंचलों के विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।शिक्षक बनने का सपना हो रहा साकारअधिकारियों ने बताया कि यह योजना केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार का भी सृजन कर रही है। चयनित विद्यार्थियों को शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित होने वाली प्री-बी.एड. (Pre-B.Ed) और टी.ई.टी. (TET) परीक्षाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन और कोचिंग दी जाती है।सीटों का गणित: 80% सीटें जनजाति वर्ग के लिए आरक्षितवर्ष 2013-14 से शुरू हुई इस योजना में सीटों का आवंटन इस प्रकार है:स्नातक स्तर (UG): गणित और विज्ञान के लिए 80-80 सीटें, वाणिज्य के लिए 40 सीटें।स्नातकोत्तर स्तर (PG): विज्ञान के लिए 80 सीटें और वाणिज्य के लिए 20 सीटें।बी.एड. कार्यक्रम: कुल 200 सीटें।कुल स्वीकृत 500 सीटों में से 80 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं, ताकि समाज के सबसे पिछड़े तबके को आगे बढ़ने का मौका मिल सके।बढ़ रही है छात्रों की रुचि और भागीदारीआंकड़े बताते हैं कि सरकार की इस पहल का सकारात्मक असर दिख रहा है और छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है:वर्ष 2023-24: दुर्ग केंद्र में 452 बालिकाओं और जगदलपुर में 168 बालकों ने प्रवेश लिया।वर्ष 2024-25: दुर्ग में संख्या बढ़कर 473 और जगदलपुर में 199 हो गई।वर्ष 2025-26 (वर्तमान सत्र): कन्या शिक्षण केंद्र दुर्ग में 477 और बालक शिक्षण केंद्र जगदलपुर में 275 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया है।चयनित विद्यार्थियों की सफलता दर भी उत्साहजनक है। जहाँ पिछले वर्षों में दर्जनों विद्यार्थी विभिन्न पदों पर चयनित हुए हैं, वहीं इस योजना से न केवल विज्ञान और वाणिज्य में छात्रों की पकड़ मजबूत हो रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित करियर भी मिल रहा है।

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