वनांचल के पथरीले रास्तों पर सिर पर भारी बर्तन रखे पानी के लिए जद्दोजहद करती महिलाएं कभी जशपुर की पहचान हुआ करती थीं। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। जल जीवन मिशन के तहत जशपुर के गांवों में अब ‘घर-घर जल’ का संकल्प जमीन पर उतर आया है, जिससे ग्रामीण जीवन न केवल आसान हुआ है, बल्कि अधिक सम्मानजनक भी बन गया है।
आंकड़ों से कहीं बड़ी है यह राहत
तकनीकी आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2023 से फरवरी 2026 के बीच जिले में 20,300 से अधिक घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। प्रशासन ने सौर ऊर्जा का लाभ उठाते हुए 430 सोलर पंप लगाए हैं और 518 नलकूपों का खनन किया है। अब तक जिले के 52 गांव पूरी तरह से ‘हर घर जल’ प्रमाणित हो चुके हैं। लेकिन इन नंबरों के पीछे छिपी है वह मुस्कान, जो एक गृहिणी के चेहरे पर तब आती है जब वह सुबह उठकर अपने ही आंगन में नल खोलती है।
महिलाओं और बेटियों के जीवन में नई सुबह
इस मिशन का सबसे मानवीय पहलू महिलाओं का सशक्तिकरण है। प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी की उपलब्धता ने महिलाओं को उस शारीरिक कष्ट से मुक्ति दिलाई है, जिसके कारण उन्हें कमर और घुटनों के दर्द की शिकायत रहती थी।
इसका एक सुखद असर शिक्षा पर भी पड़ा है। जशपुर के दूरस्थ इलाकों में पहले बच्चियां स्कूल जाने के बजाय पानी लाने में अपनी माताओं की मदद करती थीं। अब घर में पानी उपलब्ध होने से उनकी उपस्थिति स्कूलों में बढ़ गई है। अब वे भारी बर्तन नहीं, बल्कि हाथों में किताबें लेकर अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
बीमारियों पर लगाम, खुशहाली का पैगाम
स्वच्छ पेयजल केवल प्यास नहीं बुझा रहा, बल्कि सेहत की ढाल भी बन रहा है। दूषित पानी से होने वाले डायरिया, हैजा और पेचिश जैसे रोगों में भारी कमी आई है। आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे घातक तत्वों से मुक्ति मिलने के कारण अब ग्रामीणों का इलाज पर होने वाला खर्च कम हुआ है और औसत आयु में सुधार की उम्मीद जगी है।
जशपुर का हर घर जल अभियान आज न केवल पानी की आपूर्ति कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन की एक नई धारा बहा रहा है।
