खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पदकों की चमक के बीच असम की एक महिला वेटलिफ्टर की कहानी ने सबका दिल जीत लिया है। असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी पायेंग ने महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक (Silver Medal) जीतकर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो कोई भी बाधा माँ के सपनों को नहीं रोक सकती।
6 महीने की दुधमुँही बच्ची को छोड़ शुरू की ट्रेनिंग
पल्लवी के लिए यह पदक केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके भारी त्याग का प्रतिफल है। जब उनकी बेटी महज छह महीने की थी, तब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग रिंग में उतरने का कठिन फैसला लिया। पल्लवी ने भावुक होते हुए बताया, “एक माँ के लिए अपनी छोटी बच्ची से दूर होना आसान नहीं होता, लेकिन मुझे पता था कि अगर मुझे अपने सपनों को जीना है, तो यही सही समय है।” आज उनकी बेटी चार साल की है और अपनी नानी के पास रहकर माँ की सफलता का इंतजार कर रही है।
पति और माँ बने ढाल
पल्लवी की इस वापसी में उनके पति सुखावन थौमंग का बड़ा हाथ है। सुखावन खुद एक पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाज रह चुके हैं और वर्तमान में जम्मू में सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात हैं। उन्होंने पल्लवी को हमेशा प्रेरित किया, वहीं पल्लवी की माँ ने घर पर बच्ची की जिम्मेदारी संभाली ताकि पल्लवी अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकें।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
- शुरुआत: 2018 में वेटलिफ्टिंग करियर शुरू किया।
- चुनौती: कोविड लॉकडाउन और मातृत्व के कारण खेल से दूरी बनी।
- वापसी: 2023 के राज्य चैंपियनशिप में छठा स्थान मिला, लेकिन हार नहीं मानी।
- सफलता: 2025 में तेजपुर राज्य चैंपियनशिप में रजत और अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी फॉर्म हासिल की।
रायपुर में आयोजित इस पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का रजत पदक पल्लवी के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। पल्लवी का कहना है कि इस जीत ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भी बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं।
