पोलियो के खिलाफ जंग: जशपुर में कल 1.15 लाख बच्चों को दी जाएगी ‘दो बूंद जिंदगी की’, कलेक्टर रोहित व्यास ने कसी कमर

कल रविवार, 28 जून को जशपुर जिले का हर कोना एक बेहद अहम मिशन का गवाह बनने जा रहा है। जिले के नवजात शिशुओं से लेकर 5 साल तक के 1 लाख 15 हजार 726 बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाने के लिए ‘राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान’ का शंखनाद होने जा रहा है।

​कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने साफ संदेश दिया है कि इस अभियान में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पंचायत, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और परिवहन जैसे सभी बड़े विभागों को एक टीम की तरह काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि जिले का एक भी बच्चा इस सुरक्षा कवच से महरूम न रहे।

तीन दिन का मिशन: बूथ से लेकर घर-घर तक दस्तक

​यह अभियान सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे तीन दिनों का महा-अभियान है:

  • 28 जून (पहला दिन): माता-पिता अपने बच्चों को लेकर नजदीकी पोलियो बूथ पर आएं और दवा पिलाएं।
  • 29 और 30 जून (दूसरा व तीसरा दिन): अगर कोई बच्चा रविवार को छूट जाता है, तो स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद चलकर आपके घर के दरवाजे पर दस्तक देंगी।

​इसके अलावा बस स्टैंड, हाट-बाजार, ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों जैसी जगहों पर रहने वाले प्रवासी और संवेदनशील बच्चों के लिए विशेष मोबाइल टीमें बनाई गई हैं, जो घूम-घूम कर बच्चों को तलाशेंगी और दवा पिलाएंगी।

मैदान में डटे 4,464 ‘पोलियो वॉरियर्स’

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मुताबिक, इस अभियान को कामयाब बनाने के लिए जिलेभर में 1,205 बूथ बनाए गए हैं। ग्राउंड जीरो पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिनों को मिलाकर कुल 4,464 कर्मियों की फौज तैनात रहेगी, जिनकी पल-पल की निगरानी 224 सुपरवाइजर करेंगे।

आपके ब्लॉक का क्या है गणित? (विकासखंडवार आंकड़े)

​जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस बार बगीचा और पत्थलगांव ब्लॉक पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। अलग-अलग ब्लॉकों में बूथों और बच्चों की संख्या कुछ इस तरह रहेगी:

  • पत्थलगांव: 192 बूथों पर 26,089 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य
  • बगीचा: 219 बूथों पर 23,446 बच्चों को पिलाई जाएगी खुराक
  • फरसाबहार: 147 बूथों पर 14,673 बच्चे
  • जशपुर: 173 बूथों पर 13,049 बच्चे
  • कुनकुरी: 152 बूथों पर 12,984 बच्चे
  • कांसाबेल: 84 बूथों पर 10,273 बच्चे
  • मनोरा: 146 बूथों पर 8,285 बच्चे
  • दुलदुला: 92 बूथों पर 6,926 बच्चे

जब भारत पोलियो मुक्त है, तो फिर यह दवा क्यों जरूरी है?

​स्वास्थ्य विभाग ने एक बहुत ही जरूरी बात याद दिलाई है। डब्लूएचओ (WHO) ने 27 मार्च 2014 को ही भारत को ‘पोलियो मुक्त देश’ घोषित कर दिया था। हम पिछले 14 सालों से इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

लेकिन खतरा अभी टला नहीं है: दुनिया के कुछ देशों में आज भी पोलियो का वायरस जिंदा है और यह कभी भी सरहदें पार कर लौट सकता है। जब तक दुनिया से इसका नामोनिशान नहीं मिट जाता, तब तक हमारे बच्चों को यह सुरक्षा चक्र देना बेहद जरूरी है।

प्रशासन की अपील: सीएमएचओ ने जशपुर के सभी माता-पिताओं और अभिभावकों से हाथ जोड़कर अपील की है कि कल सुबह सबसे पहले अपने 0 से 5 साल तक के बच्चों को पास के बूथ पर ले जाएं। दो बूंद दवा पिलाएं और उनके स्वस्थ, मुस्कुराते कल की नींव रखें।

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