जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने जनदर्शन में सुनीं समस्याएं; बोले– हर आवेदन का समय पर और गुणवत्तापूर्ण निराकरण हो

जशपुरनगर।

शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने और आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जशपुर कलेक्टोरेट में साप्ताहिक जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले के विभिन्न दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों से मुलाकात की और एक-एक कर उनकी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं को गंभीरता से सुना।

​कलेक्टर श्री व्यास ने स्पष्ट किया कि जनदर्शन का मूल उद्देश्य लोगों को राहत पहुंचाना है, इसलिए आवेदनों पर सिर्फ औपचारिकता न की जाए, बल्कि उनका जमीनी और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित हो।

​जनदर्शन: जनसमस्याओं पर एक नजर

​आज के जनदर्शन कार्यक्रम में जिलेभर से कुल 34 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों में मुख्य रूप से निम्नलिखित जनसुविधाओं और मांगों से जुड़े मामले शामिल थे:

  • राजस्व मामले: भूमि विवाद, सीमांकन और नामांतरण से जुड़े प्रकरण।
  • बुनियादी सुविधाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़क मरम्मत और स्वच्छता से जुड़ी मांगें।
  • सामाजिक सुरक्षा व आजीविका: सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आजीविका संवर्धन से संबंधित आवेदन।
  • अधोसंरचना विकास: विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं के विस्तार की मांग।

​कलेक्टर के कड़े निर्देश: जवाबदेही और पारदर्शिता हो प्राथमिकता

​कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने प्राप्त सभी आवेदनों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों के लिए मुख्य रूप से तीन बातें रेखांकित कीं:

1. समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण: हर एक आवेदन का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर परीक्षण कर उसका पारदर्शी समाधान किया जाए।

2. संवेदनशीलता और जवाबदेही: जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारी पूरी तरह संवेदनशील रहें और जिम्मेदारी के साथ फाइलों का निपटारा करें।

3. आवेदकों को मिले अपडेट: आवेदनों पर विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी समय पर संबंधित आवेदक को भी दी जाए ताकि उन्हें भटकना न पड़े।

​विशेष रूप से पेयजल, सड़क और स्वच्छता जैसे बुनियादी जनसुविधाओं से जुड़े मामलों पर कलेक्टर ने अधिकारियों को तत्काल मौके का मुआयना कर राहत देने पर जोर दिया है, ताकि वनांचल के ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।

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