विश्व सर्प दिवस: ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं सांप, अंधविश्वास छोड़ विज्ञान आधारित सोच अपनाएं: वन्यजीव विशेषज्ञ

जशपुर।

“हर बचाया गया सांप केवल एक बेजुबान जीव नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है।” यह बात विश्व सर्प दिवस (16 जुलाई) के मौके पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने कही। इस विशेष दिन पर प्रकृति प्रेमियों ने समाज से अपील की है कि सांपों को भय, नफरत और अंधविश्वास की नजर से देखने के बजाय, उन्हें प्रकृति के एक महत्वपूर्ण प्रहरी के रूप में स्वीकार करें।

खेत और पर्यावरण के सच्चे मित्र हैं सांप

​पर्यावरणविदों के अनुसार, सांप इंसानों के दुश्मन नहीं बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने वाले प्रमुख घटक हैं। ये खेतों और बस्तियों में चूहों व अन्य छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे न केवल फसलों की बर्बादी रुकती है बल्कि कई तरह की महामारियों का खतरा भी टल जाता है।

​जशपुर क्षेत्र में लंबे समय से सर्प संरक्षण और लोगों को जागरूक करने के अभियान में जुटे राहुल तिवारी ने बताया, “आमतौर पर लोगों में सांपों को लेकर जरूरत से ज्यादा खौफ होता है। हकीकत यह है कि अधिकांश सांप विषहीन (Non-venomous) होते हैं। सांप कभी भी खुद से इंसान पर हमला नहीं करता, वह केवल आत्मरक्षा में ही पलटवार करता है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि घर, आंगन या खेत में सांप दिखाई दे, तो कानूनन उसे मारने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को तुरंत सूचित करें।

फोटोग्राफी के जरिए बदल रही है सोच

​वहीं, जाने-माने वन्यजीव फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी अश्विनी चौहान का मानना है कि सांपों के प्रति समाज का नजरिया बदलने में सही जानकारी और दृश्यों (Visuals) की बड़ी भूमिका है। चौहान ने कहा, “कैमरे के माध्यम से वन्यजीवों की वास्तविक और खूबसूरत छवि लोगों तक पहुंचाना ही मेरा उद्देश्य है। जब लोग इन जीवों के व्यवहार को करीब से देखते हैं, तो उनका डर दूर होता है। समाज को अब रूढ़िवादी भ्रांतियों को छोड़कर विज्ञान आधारित जानकारी को अपनाना होगा।”

बरसात में बढ़ जाता है खतरा, झाड़-फूंक से रहें दूर

​राहुल तिवारी और अश्विनी चौहान ने संयुक्त रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों को सचेत करते हुए कहा कि मानसून के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भर जाता है। इस वजह से वे सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में अक्सर मानव बस्तियों और घरों का रुख करते हैं। ऐसे में घबराने या आपा खोने के बजाय शांत रहकर सावधानी बरतनी चाहिए।

​विशेषज्ञों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (Snake bite) की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करना जानलेवा साबित हो सकता है। सर्पदंश का एकमात्र इलाज अस्पताल में उपलब्ध ‘एंटी-स्नेक वेनम’ (Anti-Snake Venom) है, इसलिए पीड़ित को बिना देरी किए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।

युवाओं से आगे आने का आह्वान

​विश्व सर्प दिवस के इस वैश्विक मंच से दोनों ही विशेषज्ञों ने युवा पीढ़ी से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के अभियानों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या चुनिंदा संस्थाओं की नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसके लिए जागरूक होना होगा।

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