जशपुरनगर, 19 जुलाई 2026
जिले में खेती को अधिक टिकाऊ, लागत-मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए कृषि विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति (Soil Fertility) को बनाए रखने और उसमें जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से किसानों को हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और गोबर खाद के इस्तेमाल के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।
उप संचालक कृषि (जशपुर) के अनुसार, इस मुहिम का असल मकसद रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता को कम करना और वैज्ञानिक तरीके से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) को बढ़ावा देना है।
हरी खाद से बढ़ेगा जैविक कार्बन, सुधरेगी खेत की सेहत
कृषि विभाग इन दिनों जिले के किसानों को अपने खेतों में ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद वाली फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
- फायदे: हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की आंतरिक संरचना में तेजी से सुधार होता है। यह जमीन में प्राकृतिक रूप से जैविक पदार्थों की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे भविष्य में महंगे रासायनिक खादों की जरूरत बेहद कम हो जाती है।
- शासकीय योजना: राज्य शासन द्वारा संचालित ‘हरी खाद कार्यक्रम’ के तहत किसानों को इसे बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि लंबे समय तक भूमि की उत्पादन क्षमता सुरक्षित रहे।
वर्मी कम्पोस्ट पर जोर और पराली जलाने से रोकने की कवायद
सिर्फ हरी खाद ही नहीं, बल्कि कृषि विभाग पारंपरिक गोबर खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) और अन्य जैविक विकल्पों के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रहा है।
एक जरूरी बदलाव: विभाग किसानों को इस बात के लिए भी जागरूक कर रहा है कि वे फसलों के अवशेष (पराली आदि) को खेतों में जलाने के बजाय उसे मिट्टी में ही मिला दें (समावेशित करें)। ऐसा करने से मिट्टी के भीतर मौजूद मित्र बैक्टीरिया और जैविक तत्व नष्ट नहीं होते और भूमि की जीवन-क्षमता दीर्घकाल तक बनी रहती है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): अब हवा में नहीं, वैज्ञानिक जांच के आधार पर होगी खेती
जिले के किसानों को अब उनके खेतों की मिट्टी की जांच के आधार पर ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ सौंपे जा रहे हैं। यह कार्ड किसानों के लिए एक गाइड की तरह काम करता है, जिससे उन्हें निम्नलिखित लाभ मिल रहे हैं:
- सटीक जानकारी: खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि) की कमी है या अधिकता, इसकी सटीक रिपोर्ट मिलती है।
- संतुलित उपयोग: कार्ड में दी गई विशेषज्ञों की अनुशंसा के बाद किसान उतनी ही खाद डालते हैं जितनी जमीन को जरूरत होती है। इससे अनावश्यक खर्च बचता है।
- लागत में कमी: अंधाधुंध रासायनिक खाद न खरीदने के कारण खेती की कुल लागत में बड़ी गिरावट आती है।
कृषि विभाग की किसानों से अपील: “आने वाली पीढ़ी के लिए बचाएं जमीन की ताकत”
कृषि विभाग ने जशपुर के तमाम किसान भाइयों से अपील की है कि वे बाजार से सीधे खाद खरीदने के बजाय पहले अपने खेत का मृदा परीक्षण (Soil Test) कराएं और विशेषज्ञों की सलाह पर ही संतुलित मात्रा में उर्वरक डालें।
विभाग का कहना है कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण केवल आज की अच्छी फसल के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि को उपजाऊ बनाए रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। जैविक खाद और वैज्ञानिक पद्धतियों के तालमेल से ही जिले में टिकाऊ और मुनाफे वाली खेती को मुमकिन बनाया जा सकता है।
