​’जश लर्न’ कार्यक्रम: कुनकुरी की सहायक शिक्षिका अनिता एक्का को ‘गोल्ड कैटेगरी’ सम्मान, कलेक्टर ने दी बधाई

जशपुरनगर।

​जशपुर जिले में प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों का गणितीय कौशल सुधारने के लिए संचालित ‘जश लर्न’ कार्यक्रम में विकासखंड कुनकुरी की शिक्षिका अनिता एक्का ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और नवाचार से एक मिसाल कायम की है। प्राथमिक शाला गोरिया में पदस्थ सहायक शिक्षिका सुश्री अनिता एक्का को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘गोल्ड कैटेगरी’ सम्मान से नवाजा गया है। वे कुनकुरी विकासखंड की पहली ऐसी शिक्षिका हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम में यह उपलब्धि हासिल की है।

फोन कॉल के जरिए सुधारी बच्चों की गणित

​सुश्री अनिता एक्का ने ‘जश लर्न’ अभियान के तहत समर्पित भाव से कार्य करते हुए जिले में सर्वाधिक ट्यूटरिंग कॉल किए। उन्होंने स्कूल समय के बाद नियमित रूप से विद्यार्थियों के अभिभावकों से फोन पर संपर्क साधा और बच्चों को जोड़, घटाव, गुणा तथा भाग जैसी गणित की आधारभूत संक्रियाओं का अभ्यास कराया। उनके इस सतत प्रयास और व्यक्तिगत जुड़ाव के कारण बच्चों में न केवल गणित के प्रति रुचि बढ़ी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला।

कलेक्टर ने बताया अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा

​शिक्षिका की इस शानदार उपलब्धि पर जशपुर कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं विभागीय अधिकारियों ने उन्हें बधाई व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

​कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने कहा:

“सुश्री अनिता एक्का की यह सफलता पूरे जिले के शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके इस समर्पण से ‘जश लर्न’ कार्यक्रम के मूल उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी, जिससे जिले के अधिक से अधिक बच्चे गणित में दक्ष हो सकेंगे।”

क्या है ‘जश लर्न’ कार्यक्रम?

​छत्तीसगढ़ में केवल जशपुर जिले में संचालित यह एक अनूठी और नवाचारी शैक्षणिक पहल है। इसके तहत कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों के गणित स्तर को सुधारने का लक्ष्य रखा गया है।

  • बेसलाइन आकलन: कार्यक्रम की शुरुआत में बच्चों की सीखने की क्षमता का बेसलाइन टेस्ट लिया जाता है।
  • साप्ताहिक ट्यूटरिंग: प्रत्येक सप्ताह हर स्कूल से तीन विद्यार्थियों का चयन कर शिक्षकों द्वारा उनके अभिभावकों के माध्यम से फोन पर उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) दिया जाता है।
  • सामुदायिक जुड़ाव: इस पहल ने स्कूल और घर के बीच की दूरी को मिटाकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा से सीधे जोड़ दिया है।

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