जनजातीय संस्कृति और परम्पराओं को सहेजना हम सबका सामूहिक दायित्व: कलेक्टर रोहित व्यास, ‘धरोहर’ पत्रिका के अनुमोदन पर हुई अहम बैठक

जशपुरनगर:

जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परम्पराओं और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखना केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। हमारी संस्कृति और जीवनशैली ही हमारी असली पहचान हैं और इन्हें नई पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बात कलेक्टर रोहित व्यास ने जनजातीय समाज की परम्पराओं पर केंद्रित पत्रिका ‘धरोहर’ के अनुमोदन को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में कही।

कलेक्टर ने जोर देते हुए कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सदियों का इतिहास, सामाजिक मूल्य, प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सामूहिक जीवन की गहरी सीख समाहित है। आधुनिकता के इस दौर में इन मौखिक परम्पराओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण बेहद आवश्यक है। ‘धरोहर’ पत्रिका समाज की पारंपरिक जीवनशैली, लोकगीत, लोकनृत्य, पर्व-त्योहार, लोककथाएं, वेशभूषा, गोदना कला और पारंपरिक खान-पान को एक प्रामाणिक लिखित रूप देने में मील का पत्थर साबित होगी।

बुजुर्गों के पारंपरिक ज्ञान और लोक स्मृतियों को मिलेगा स्थान

बैठक में उपस्थित जनजातीय समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने पत्रिका को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए। प्रतिनिधियों ने कहा कि जशपुर की माटी में जल, जंगल और जमीन के प्रति कृतज्ञता की गहरी परम्परा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पत्रिका में अंचल के वरिष्ठजनों के अनुभवों, पारंपरिक जड़ी-बूटी व ज्ञान परम्परा तथा लोक स्मृतियों को प्रमुखता से संकलित किया जाए, ताकि युवा पीढ़ी अपने पुरखों की गौरवशाली जीवनशैली से रूबरू हो सके।

कलेक्टर रोहित व्यास ने समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे युवाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों और संरक्षण के काम से जोड़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी जड़ों और इतिहास को जानने वाला समाज ही अपनी पहचान को मजबूती से आगे बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों की रही सक्रिय भागीदारी

बैठक में ‘धरोहर’ पत्रिका की विषय-वस्तु, डिजाइन और प्रकाशन की रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान एसडीएम (राजस्व) मस्के, विषय विशेषज्ञ डॉ. विजय रक्षित, डॉ. विनय तिवारी सहित रूपेश पाणिग्राही एवं श्रीमती लक्ष्मी शुक्ला उपस्थित रहीं।

जनजातीय समाज की ओर से उमेश राम प्रधान, पुरुषोत्तम राम, रामप्रसाद नागेश, राधेश्वर राम प्रधान, रोपन राम अगरिया, सुखराम अगरिया, श्रीमती दीपावली अगरिया, शंकर राम बरला, श्रीमती रीना बरला, वीर सिंह, प्रहलाद नागेश और विनोद राम भगत सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

कलेक्टर को भेंट की गईं पुस्तकें

बैठक के अंत में विषय विशेषज्ञ डॉ. विजय रक्षित ने कलेक्टर रोहित व्यास को अपनी लिखी पुस्तकें ‘पर्यटन का स्वर्ग-जशपुर’ और ‘नारी सौंदर्य का प्रतीक-गोदना’ की प्रतियां भेंट कीं। कार्यक्रम का समापन जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिन्हा के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। उपस्थित प्रतिनिधियों ने प्रशासन और समाज के इस साझा समन्वय की सराहना करते हुए इसे भविष्य में भी निरंतर बनाए रखने का संकल्प लिया।

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