बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता बढ़कर होगी 300; टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से तराशी जाएंगी वनांचल और ग्रामीण प्रतिभाएं
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण, वनांचल और जनजातीय अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने की असीम क्षमता है। सरकार का लक्ष्य प्रतिभाओं को शुरुआती उम्र में पहचानकर उन्हें आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, उच्चस्तरीय कोचिंग और सुनियोजित प्रशिक्षण तंत्र उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाने वाली खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतिभा की पहचान से लेकर पोडियम फिनिश तक का सफर पूरी तरह पारदर्शी और संसाधनयुक्त होना चाहिए। कोई भी खिलाड़ी केवल अवसर या आधुनिक संसाधनों के अभाव में पीछे नहीं छूटेगा।
फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: 5 साल का रोडमैप तैयार
बैठक में आगामी 5 वर्षों के लिए एक मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम और वित्तीय प्रबंधन का खाका खींचा गया:
- तीन-स्तरीय प्रशिक्षण मॉडल: जमीनी स्तर पर ग्रामीण व नगरीय प्रतिभाओं को तराशने के लिए फीडर सेंटर बनेंगे। इसके बाद उन्हें उच्च प्रदर्शन केंद्रों और फिर शीर्ष ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ से जोड़ा जाएगा।
- बिलासपुर एक्सीलेंस सेंटर का विस्तार: बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर में आवासीय एथलीटों की क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 की जाएगी और नई खेल विधाएं जोड़ी जाएंगी।
- प्राथमिकता वाले खेल: एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी पर विशेष फोकस रहेगा।
- स्पोर्ट्स साइंस और न्यूट्रिशन: खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस सुधारने के लिए स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, वैज्ञानिक पोषण, नियमित हेल्थ चेकअप, इंजरी मैनेजमेंट और रिहैबिलिटेशन को ट्रेनिंग का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा।
स्कूलों से शुरू होगी खेल संस्कृति, टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी का होगा आयोजन
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खेल संस्कृति की नींव स्कूलों से मजबूत की जाए। व्यायाम शिक्षकों (PET) के जरिए जमीनी स्तर पर बच्चों को खेलों से जोड़ते हुए खेलों को एक सफल करियर विकल्प के रूप में स्थापित किया जाएगा।
प्रतिभाओं की सीधी खोज के लिए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर टैलेंट हंट और ‘मुख्यमंत्री ट्रॉफी’ प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। इससे खिलाड़ियों को नियमित मैच प्रैक्टिस मिलेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। इसके अलावा महिला और दिव्यांग (पैरा) खिलाड़ियों के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, खेल सचिव यशवंत कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
