बस्तर में बाढ़ का पानी उतरने के साथ पटरी पर लौटा जनजीवन, बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जगदलपुर (बस्तर):

बस्तर अंचल में बीते दिनों भारी बारिश और बाढ़ का तांडव झेलने के बाद अब हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। प्रमुख नदियों और नालों का जलस्तर नीचे आ चुका है, जिससे कट चुके गांवों का संपर्क फिर से बहाल हो रहा है। राहत के बीच अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पूरा फोकस जलजनित (water-borne) और मौसमी बीमारियों को फैलने से रोकने पर टिक गया है।

क्यों बने थे बाढ़ के हालात?

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से 23 से 26 सितम्बर के दौरान बस्तर संभाग में मूसलाधार बारिश हुई थी। इसी दौरान पड़ोसी राज्य ओडिशा के खातीगुड़ा और मुरान बांध के गेट खोले जाने से बस्तर के निचले इलाकों और अंदरूनी गांवों में भारी जलभराव हो गया था। जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था और कई रास्ते बंद हो गए थे। अब पानी उतरने के साथ ग्रामीण अपने घरों की ओर लौट रहे हैं और दैनिक कामकाज पटरी पर आने लगा है।

प्रभावित बस्तियों में मेडिकल कैंप, दवाओं और ORS का वितरण

बाढ़ का पानी हटने के बाद कीचड़, गंदगी और दूषित पानी से डायरिया, हैजा और संक्रामक बुखार फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें ग्राउंड जीरो पर उतर चुकी हैं:

  • घर-घर निगरानी और कैंप: प्रभावित गांवों में स्पेशल मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
  • जरूरी दवाओं की किट: ग्रामीणों को मौके पर ही जरूरी एंटीबायोटिक्स, बुखार की दवाएं और ओआरएस (ORS) के पैकेट बांटे जा रहे हैं।
  • त्वरित इलाज की व्यवस्था: संक्रामक बीमारियों के लक्षण दिखने पर मरीजों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई की सख्त हिदायत

स्वास्थ्य अमला गांव-गांव पहुंचकर लोगों को सीधे तौर पर सतर्क कर रहा है। ग्रामीणों को साफ हिदायत दी गई है कि वे किसी भी सूरत में कुओं या खुले जलस्रोतों का पानी सीधे न पिएं। पानी को अच्छी तरह उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर ही इस्तेमाल करने को कहा गया है। इसके अलावा घरों के आसपास जमा गंदे पानी को निकालने और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित इलाकों में स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक मेडिकल टीमें बस्तर के अंदरूनी इलाकों में लगातार कैंप करती रहेंगी।

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