छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति और विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उन युवाओं को गले लगा रही है, जो भटककर माओवाद की राह पर चले गए थे और अब वापस समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं। इन पुनर्वासित युवाओं को न केवल नया जीवन दिया जा रहा है, बल्कि उनकी सेहत और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है।
दस्तावेजों से लेकर बेहतर स्वास्थ्य तक का सफर
प्रशासन का मानना है कि पुनर्वास का मतलब सिर्फ हथियार डलवाना नहीं, बल्कि उन्हें एक सम्मानित नागरिक के रूप में स्थापित करना है। इसी कड़ी में, इन युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर राशन कार्ड और अन्य आवश्यक पहचान पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाल ही में जिला चिकित्सालय बीजापुर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर इन युवाओं को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए।
इलाज के लिए अब नहीं होगी पैसों की चिंता
आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इन युवाओं को निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे:
- ₹5 लाख तक का इलाज: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह योजना के तहत बीपीएल परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।
- ₹50 हजार का लाभ: सामान्य (एपीएल) परिवारों के लिए 50 हजार रुपये तक की चिकित्सा सुविधा।
- गंभीर बीमारियों के लिए बड़ी राहत: ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ के तहत दुर्लभ और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकार ₹25 लाख तक की सहायता देगी।
युवाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान
कार्ड मिलने के बाद युवाओं में एक अलग ही आत्मविश्वास देखने को मिला। उनका कहना है कि पहले वे डर और अनिश्चितता के साये में रहते थे, लेकिन अब उन्हें महसूस हो रहा है कि सरकार उनके और उनके परिवार के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठा रही है। इससे उन्हें समाज में आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा मिली है।
समावेशी विकास का ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’
यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार की उस दूरगामी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा देना उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाने और विकास की दौड़ में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
