जशपुरनगर (16 जुलाई 2026): मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। ग्राम दोकड़ा में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किसानों के लिए ‘समृद्धि की पाठशाला’ का विशेष आयोजन किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे जशपुर देश में आधुनिक सिंचाई का एक बड़ा मॉडल बनकर उभरेगा।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास और जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक श्री शुभम पटोरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय सरपंच, किसान और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।
देश की 34 चुनिंदा परियोजनाओं में शामिल है ‘बगिया क्लस्टर’
समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री आलोक अग्रवाल और विभागीय अधिकारियों के अनुसार, देश के 23 राज्यों में कुल 34 योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ का एकमात्र ‘बगिया क्लस्टर’ शामिल है।
- परियोजना की लागत: इस योजना के लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि योजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।
- समय सीमा: इस पूरी कार्ययोजना को अगले 6 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- सौर ऊर्जा और हाई-टेक तकनीक: इस परियोजना में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह सौर ऊर्जा (Solar Energy) के माध्यम से होगी। इसके अलावा, पानी के नियंत्रित और वैज्ञानिक उपयोग के लिए SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
बिना भूमि अधिग्रहण के हर खेत तक पहुंचेगा पानी
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिंचाई के लिए पाइपलाइन जमीन के नीचे से होकर गुजरेगी। इसके कारण किसानों की उपजाऊ जमीन का भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। किसानों को इस वृहद सिंचाई परियोजना का व्यावहारिक मॉडल दिखाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा मध्य प्रदेश के मोहनपुरा कुंडलिया क्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया था।
योजना के तीन मुख्य स्तंभ:
जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक श्री शुभम पटोरी ने इस परियोजना के संचालन को तीन प्रमुख हिस्सों में समझाया:
- अंडरग्राउंड पाइपलाइन: जमीन के अंदर से सीधे किसानों के खेतों तक पानी की निर्बाध सप्लाई।
- स्थानीय प्रबंधन: गांवों के स्तर पर ‘जल प्रबंधन समितियां’ (जल उपभोक्ता समिति) बनाई गई हैं, जो पानी की देखरेख और समुचित वितरण का जिम्मा संभालेंगी। इसमें महिलाओं की सहभागिता भी अनिवार्य की गई है।
- पानी का सही हिसाब-किताब: डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर यह तय होगा कि किस फसल को, कब और कितने पानी की आवश्यकता है, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी।
इन 13 गांवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से कांसाबेल ब्लॉक के कुल 13 गांवों की 4,933 हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधे सिंचाई का लाभ मिलेगा। लाभान्वित होने वाले गांवों में शामिल हैं:
बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड।
शुरुआती 5 साल ठेकेदार संभालेगा रख-रखाव
परियोजना पूर्ण होने के बाद शुरुआती 5 वर्षों तक इसके संचालन और संधारण (Maintenance) की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। इसके बाद यह व्यवस्था पूरी तरह से स्थानीय जल उपभोक्ता समिति को सौंप दी जाएगी। इस तकनीक के आने से किसानों की मानसून पर निर्भरता खत्म होगी और वे साल में दो से तीन फसलें आसानी से ले सकेंगे, जिससे उनकी आय में स्थायी सुधार होगा।
