बाल मधुमेह (टाइप-१ डायबिटीज) से पीड़ित बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने और उनके परिवारों का हौसला बढ़ाने के लिए जशपुर में एक बेहद संवेदनशील और जरूरी पहल की गई। जिला स्वास्थ्य समिति, जशपुर द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ और एकम फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से ‘रोगी सहायता समूह’ (Patient Support Group – PSG) की एक विशेष फॉलो-अप बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पीड़ित बच्चों को यह अहसास कराना था कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं, और सही प्रबंधन से एक बेहतरीन और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम में ६ बाल मधुमेह प्रभावित बच्चों ने अपने ८ अभिभावकों और देखभालकर्ताओं के साथ हिस्सा लिया। कुल ३२ प्रतिभागियों की मौजूदगी में यह बैठक महज एक सरकारी औपचारिकता न रहकर, परिवारों के लिए अपने अनुभव और दर्द साझा करने का एक आत्मीय और सहयोगात्मक मंच बन गई।
नियमित देखभाल और हौसला ही सबसे बड़ी दवा: CMHO
अभिभावकों को ढांढस बंधाते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जी. एस. जात्रा ने कहा,
”बाल मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिससे डरने की नहीं, बल्कि लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों की नियमित जांच, समय पर इंसुलिन देना और डॉक्टरी सलाह का पालन करना ही उनके सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।”
उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला स्वास्थ्य विभाग इन बच्चों की हर संभव मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी बैठकें परिवारों को मानसिक और सामाजिक संबल देती हैं, जिससे बीमारी से लड़ना आसान हो जाता है।
क्या है टाइप-१ डायबिटीज और कैसे रखें ख्याल?
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जानकी भगत ने बेहद सरल शब्दों में परिवारों को इस बीमारी की बारीकियां समझाईं। उन्होंने बताया कि टाइप-१ डायबिटीज में बच्चे का शरीर खुद इंसुलिन नहीं बना पाता, जिससे खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।
डॉ. जानकी भगत ने बेहतर जीवन प्रबंधन के लिए ये ४ जरूरी सूत्र दिए:
१. नियमित इंसुलिन: इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, कभी भी खुराक न छोड़ें।
२. रक्त शर्करा (Blood Sugar) की निगरानी: घर पर नियमित रूप से शुगर की जांच करें।
३. संतुलित पोषण: बच्चों के आहार में सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हरी सब्जियां शामिल करें।
४. शारीरिक गतिविधि व सुरक्षा: बच्चों को खेलने-कूदने के लिए प्रेरित करें और उन्हें किसी भी तरह के संक्रमण से बचाकर रखें।
उन्होंने अभिभावकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो ये बच्चे भी किसी भी अन्य सामान्य बच्चे की तरह ही प्रतिभावान, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
सवाल-जवाब से दूर हुईं मन की शंकाएं
इस बैठक की सबसे खास बात इसका संवादात्मक होना रही। अभिभावकों ने खुलकर अपनी रोजमर्रा की परेशानियां और बच्चों के मूड स्विंग्स से जुड़े सवाल डॉक्टरों के सामने रखे। जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. उदय भगत ने सभी की जिज्ञासाओं का समाधान किया और जिले में उपलब्ध मुफ्त जांच व स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने परिवारों से कहा कि किसी भी आपात स्थिति या असमंजस में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) राजीव रंजन मिश्रा, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि समाज में बाल मधुमेह के प्रति जागरूकता फैलाने और इन बच्चों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
