जशपुरनगर, 25 जून 2026:
शासकीय योजनाएं जब फाइलों से निकलकर सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो उसका असर उनके चेहरों पर साफ नजर आता है। कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार (24 जून) को जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड में देखने को मिला।
कलेक्टर श्री रोहित व्यास की विशेष पहल और निर्देश पर बगीचा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ‘दिव्यांगजन प्रमाणीकरण एवं यूडीआईडी कार्ड शिविर’ का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना और एक ही जगह पर उन्हें उनके अधिकार सौंपना था। सुबह 10 बजे से शुरू हुए इस शिविर में दूर-दराज के गांवों से पहुंचे कुल 368 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया गया।
सालो देवी को मिला श्रवण यंत्र का उपहार
इस शिविर का सबसे भावुक पल तब आया जब ग्राम रौनी रोड (कुरुमकेला) की रहने वाली 88 वर्षीय बुजुर्ग महिला श्रीमती सालो देवी शिविर में पहुंचीं। उम्र के इस पड़ाव में उन्हें सुनने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में अधिकारियों ने उनकी परेशानी को समझा और मौके पर ही उन्हें सहायक उपकरण के रूप में ‘श्रवण यंत्र’ (Hearing Machine) प्रदान किया। मशीन लगते ही जब उन्हें फिर से स्पष्ट सुनाई देने लगा, तो उनके चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी।
पहचान पत्र से लेकर पेंशन तक की सुविधा
शिविर में केवल प्रमाण पत्र ही नहीं बांटे गए, बल्कि दिव्यांगों के समग्र सशक्तिकरण पर जोर दिया गया:
- यूडीआईडी कार्ड (UDID): शिविर में 192 ऐसे दिव्यांगों का चिन्हांकन और पंजीयन किया गया, जिनके पास अब तक यह महत्वपूर्ण कार्ड नहीं था। कई पुराने कार्ड्स के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
- पेंशन और ऋण: 50 से अधिक हितग्राहियों को दिव्यांग पेंशन योजना और खुद का रोजगार शुरू करने के लिए मिलने वाले दिव्यांग ऋण के बारे में विस्तार से समझाया गया और पात्र लोगों से आवेदन भी लिए गए।
- कृत्रिम अंग: दो दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग (Artificial Limbs) लगवाने की प्रक्रिया और सुविधाओं की जानकारी देकर उनका मार्गदर्शन किया गया।
अधिकारियों की रही मुस्तैदी
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग का बेहतरीन तालमेल दिखा। शिविर में जशपुर के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. दीपदेव कश्यप, समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री धर्मेंद्र कुमार साहू, जनपद पंचायत बगीचा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) समेत दोनों विभागों के कई कर्मचारी दिन भर मुस्तैद रहे।
एक ही छत के नीचे प्रमाणीकरण, पहचान पत्र बनाने और सहायक उपकरणों के वितरण जैसी सुविधाओं ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन संवेदनशील हो, तो शासकीय योजनाओं का प्रभावी और सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
