जशपुर में नाबार्ड के स्वतंत्र कार्यालय का शुभारंभ; प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए ₹1428 करोड़ की ऋण योजना जारी

जशपुरनगर, 25 जून 2026:

जशपुर जिले के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जिला विकास प्रबंधक (DDM) का स्वतंत्र कार्यालय अब जशपुर में शुरू हो गया है। बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री अभिषेक कुमार के मुख्य आतिथ्य में इस कार्यालय का भव्य शुभारंभ किया गया।

​अब तक जशपुर जिला रायगढ़ से संबद्ध था, जिस वजह से नाबार्ड की तमाम गतिविधियों का संचालन रायगढ़ कार्यालय से ही होता था। अब स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र कार्यालय खुल जाने से जिले के किसानों को सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

₹1428 करोड़ का बड़ा ऋण खाका तैयार

​इस खास मौके पर जिला पंचायत सीईओ ने नाबार्ड की ‘संभाव्यता आधारित ऋण योजना’ (Potential Linked Credit Plan) पुस्तिका का विमोचन किया। इस योजना के तहत जिले के विकास के लिए एक बड़ा वित्तीय खाका खींचा गया है:

  • कृषि क्षेत्र: नाबार्ड ने कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ₹865 करोड़ के ऋण की संभावना जताई है।
  • कुल प्राथमिकता क्षेत्र: जिले में ओवरऑल डेवलपमेंट (MSME, शिक्षा, आवास आदि) को मिलाकर कुल ₹1428 करोड़ के लोन की संभाव्यता आंकी गई है।

बाड़ी परियोजना से बदली 1 लाख लोगों की जिंदगी

​नवनियुक्त जिला विकास प्रबंधक प्रेम प्रकाश सिंह ने जिले की आर्थिक संभावनाओं पर एक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने जिले में अब तक 12,100 एकड़ क्षेत्र में ‘वाड़ी फलोद्यान’ और कृषि आधारित प्रोजेक्ट्स चलाए हैं। इससे 13,000 से ज्यादा आदिवासी परिवारों (लगभग 1 लाख आबादी) के जीवन में सीधा सुधार आया है।

बड़ी उपलब्धि: पिछले 5 वर्षों में इन सदस्य किसानों ने ₹100 करोड़ से अधिक का कुल संचयी लाभ कमाया है, जिसका सालाना औसत लगभग ₹25 करोड़ है। जिले से हर साल करीब 9000 मीट्रिक टन का उत्पादन हो रहा है।

प्राकृतिक खेती और प्रोसेसिंग पर रहेगा अगला फोकस

​कार्यक्रम में मौजूद नाबार्ड छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय (रायपुर) के वरिष्ठ अधिकारी बृजेन्द्र समांतराय ने लाभार्थी किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बताया कि ‘जीवा परियोजना’ के तहत किसान अब खुद प्राकृतिक खाद और कीटनाशकों के नए फॉर्मूले तैयार कर रहे हैं, जिससे नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिल रहा है।

​जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार ने नाबार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अब अगला कदम ‘प्रसंस्करण क्षमता’ (Processing Capacity) को बढ़ाना होना चाहिए, ताकि किसानों के उत्पादों को बेहतर बाजार और दाम मिल सके। उन्होंने प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया।

​कार्यक्रम के अंत में वाड़ी, जलग्रहण क्षेत्र और जीवा परियोजना में बेहतरीन काम करने वाले अग्रणी किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM), RSETI निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और विभिन्न बैंकों के अधिकारी मौजूद थे।

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