जशपुर के तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खातों में बरसे करोड़ों रुपये: ₹5500 की नई दर और ऑनलाइन भुगतान से वनांचल में आई खुशहाली

जशपुरनगर।

छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए आजीविका का सबसे बड़ा सहारा यानी ‘हरा सोना’ (तेन्दूपत्ता) अब उनके जीवन में बड़ा आर्थिक बदलाव ला रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लिए गए जनहितकारी फैसलों का सीधा असर जशपुर जिले के हजारों वनाश्रित परिवारों के चेहरों पर साफ देखा जा सकता है। सरकार ने न सिर्फ तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक की दर को बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया है, बल्कि सीधे बैंक खातों में ऑनलाइन भुगतान कर पूरी व्यवस्था से बिचौलियों का राज खत्म कर दिया है।

​इसके साथ ही, जंगलों में कंटीले रास्तों पर काम करने वाले इन वनवासियों की सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ‘चरण पादुका वितरण योजना’ का भी प्रभावी संचालन किया जा रहा है, जिससे संग्राहकों को जमीनी स्तर पर बड़ी राहत मिली है।

​सीधे खातों में पहुंची मेहनत की कमाई: आंकड़ों पर एक नजर

​जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन, जशपुरनगर के माध्यम से इस बार भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। जिले में हुए इस बड़े आर्थिक प्रवाह के तहत दो अलग-अलग वर्षों की राशि का भुगतान किया गया है:

  • वर्ष 2026 का संग्रहण पारिश्रमिक: चालू सीजन में जिले की 24 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से 33,968 संग्राहकों ने तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया। इनकी मेहनत के एवज में 16 करोड़ 37 लाख 17 हजार 680 रुपये (16,37,17,680.50 रुपये) की कुल पारिश्रमिक राशि सीधे इनके बैंक खातों में भेजी गई है।
  • वर्ष 2023 का प्रोत्साहन बोनस: पुराने संग्रहण का लाभ भी हितग्राहियों को मिला है। वर्ष 2023 में मुनाफे में रही 4 समितियों से जुड़े 7,210 संग्राहकों को 27 लाख 76 हजार 686 रुपये की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का ऑनलाइन भुगतान किया गया है।

​ऑनलाइन भुगतान से खत्म हुई बिचौलियों की भूमिका

​पहले वनांचल क्षेत्रों में यह शिकायत आम होती थी कि संग्राहकों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा समय पर नहीं मिलता था या बीच में कमीशनखोरी हो जाती थी। लेकिन अब भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है।

​सीधे बैंक खाते (DBT) में राशि पहुंचने से कई बड़े बदलाव आए हैं:

  • ​भुगतान प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
  • ​ग्रामीणों को बैंकों और समितियों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
  • ​मेहनत की गाढ़ी कमाई बिना किसी कटौती या बिचौलिये के सीधे वनाश्रितों के हाथों में सुरक्षित पहुंच रही है।

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल

​तेन्दूपत्ता संग्रहण का यह सीजन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लिए आर्थिक रीढ़ की हड्डी माना जाता है। सही समय पर इतनी बड़ी प्रोत्साहन और पारिश्रमिक राशि मिलने से स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौटेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिलेगा।

​जशपुर जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन ने जिले के सभी संग्राहकों से अपील की है कि वे आगामी सत्रों में भी इसी तरह पूरी लगन के साथ गुणवत्तापूर्ण संग्रहण का कार्य जारी रखें और शासन की वनोपज आधारित कल्याणकारी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं।

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