जशपुरनगर। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर शासकीय जी.एन.एम. नर्सिंग कॉलेज एवं जिला चिकित्सालय, जशपुर में हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण और विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जी. एस. जात्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ टीके लगाना नहीं, बल्कि समाज में इस जानलेवा बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और समय पर जांच व रोकथाम के लिए लोगों को प्रेरित करना था।
77 हितग्राहियों को दी गई पहली खुराक
शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्राथमिक स्तर पर सुरक्षा चक्र मजबूत करते हुए जी.एन.एम. नर्सिंग कॉलेज की 65 छात्राओं और 12 स्वास्थ्य कर्मियों (कुल 77 लोगों) को हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन की प्रथम खुराक दी। इसके साथ ही उपस्थित प्रतिभागियों के लिए एक विस्तृत जानकारी सत्र भी आयोजित किया गया।
”हेपेटाइटिस-बी और सी से लीवर कैंसर का खतरा” — डॉ. जी. एस. जात्रा
कार्यक्रम के दौरान CMHO डॉ. जी. एस. जात्रा ने हेपेटाइटिस के वैज्ञानिक पहलुओं और खतरों पर प्रकाश डाला:
”हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर (यकृत) में होने वाली सूजन है, जो मुख्य रूप से वायरल इंफेक्शन से फैलती है। इसके प्रमुख 5 प्रकार होते हैं— A, B, C, D और E। इनमें से हेपेटाइटिस-बी और सी सबसे ज्यादा खतरनाक हैं क्योंकि ये शरीर में लंबे समय तक बिना किसी बड़े लक्षण के बने रहते हैं और आगे चलकर लीवर सिरोसिस, लीवर फेलियर तथा लीवर कैंसर का कारण बन सकते हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर सही जांच, पूरा टीकाकरण और थोड़ी सी सतर्कता से इस बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है।
बीमारी के मुख्य लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
जागरूकता सत्र में डॉक्टरों ने बताया कि कई मामलों में शुरुआती दौर में मरीज को कोई परेशानी महसूस नहीं होती। हालांकि, शरीर में ये संकेत दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए:
- अत्यधिक थकान और कमजोरी
- भूख न लगना, उल्टी या मतली महसूस होना
- पेट के दाहिने (ऊपरी) हिस्से में दर्द और हल्का बुखार
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया के लक्षण)
- गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल
हेपेटाइटिस से बचाव के आसान और प्रभावी उपाय
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि सावधानी ही इस बीमारी से सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय साझा किए:
- हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis-B) से बचाव: इससे बचने का सबसे सुरक्षित माध्यम समय पर पूर्ण टीकाकरण करवाना है। इसके अलावा हमेशा स्टरलाइज्ड सुई व चिकित्सा उपकरणों का प्रयोग करें, केवल जांचा हुआ सुरक्षित रक्त ही इस्तेमाल में लाएं और अपनी व्यक्तिगत वस्तुएं (जैसे रेजर, टूथब्रश, नेल कटर) किसी के साथ साझा न करें। सुरक्षित व्यवहार अपनाना बेहद जरूरी है।
- हेपेटाइटिस-ए एवं ई (A & E) से बचाव: यह मुख्य रूप से दूषित खान-पान से फैलता है। इसलिए हमेशा स्वच्छ या उबला हुआ पेयजल ही पिएं, ताजा व साफ भोजन खाएं और खाने से पहले व बाद में हाथों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दें।
समय पर पूरे डोज लेने का आह्वान
शिविर के अंत में स्वास्थ्य विभाग ने सभी छात्राओं और स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि वे हेपेटाइटिस-बी के बचे हुए निर्धारित डोज भी तय समय सीमा के भीतर अवश्य पूरे करें। साथ ही, उन्हें अपने परिवार और आसपास के क्षेत्र में हेपेटाइटिस के प्रति जनजागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया गया। यह संदेश भी दिया गया कि “हेपेटाइटिस से बचाव संभव है—समय पर टीकाकरण, जागरूकता और सतर्कता अपनाकर स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।”
