सीएम हेल्पलाइन बनी दिव्यांग प्रफुल्ल के ‘पैर’, 4 महीने से बंद पड़ी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल महज कुछ दिनों में हुई दुरुस्त

जशपुर, 11 जुलाई 2026।

कहते हैं कि जब कोई दिव्यांग अपने पैरों पर खड़ा होने या आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करता है, तो उसके साधन ही उसके सबसे बड़े साथी होते हैं। जशपुर जिले के बाबू सजबहार में रहने वाले प्रफुल्ल बेक के साथ भी कुछ ऐसा ही था, लेकिन पिछले चार महीनों से उनकी यह आत्मनिर्भरता छीन चुकी थी। प्रफुल्ल दिव्यांग होने के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। पिछले साल समाज कल्याण विभाग ने उन्हें एक मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल (बैटरी से चलने वाली गाड़ी) दी थी, जिससे उनका जीवन आसान हो गया था। लेकिन, बीते चार महीनों से यह गाड़ी तकनीकी खराबी के कारण कबाड़ की तरह घर के कोने में खड़ी थी।

​दूसरों पर निर्भर हो चुके हताश प्रफुल्ल के लिए उम्मीद की नई किरण बनी— मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

शिकायत के तुरंत बाद घर पहुंची टेक्निकल टीम

​प्रफुल्ल ने थक-हारकर बीते 28 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन में अपनी इस समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही इस हेल्पलाइन की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिकायत मिलते ही समाज कल्याण विभाग तुरंत एक्शन में आ गया। विभाग ने बिना वक्त गंवाए गाड़ी ठीक करने वाली संबंधित एजेंसी के टेक्नीशियनों को सीधे प्रफुल्ल के घर भेजा और महज कुछ ही दिनों के भीतर उनकी बंद पड़ी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल को पूरी तरह ठीक कर दिया गया।

“इस गाड़ी ने मुझे दोबारा मेरे पैर लौटा दिए”

​अपनी ट्राइसाइकिल को दोबारा ठीक पाकर प्रफुल्ल के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। उन्होंने भावुक होते हुए बताया,

​”दिव्यांग होने की वजह से मैं खुद चल-फिर नहीं सकता। यह मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मेरे लिए मेरे पैरों की तरह काम करती है। जब यह खराब हुई, तो मैं कहीं भी आने-जाने के लिए दूसरों का मोहताज हो गया था। मुझे लगने लगा था कि अब मेरी परेशानी कभी दूर नहीं होगी।”

​प्रफुल्ल ने आगे कहा कि सीएम हेल्पलाइन उनके जैसे गरीब और बेबस लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उनकी समस्या का समाधान समय-सीमा से पहले ही हो गया। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का तहेदिल से आभार जताते हुए कहा, “मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दोबारा ठीक हो जाने से मैं फिर से आत्मनिर्भर हो पाया हूँ। यह हमारे मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील सोच की वजह से ही संभव हो सका है।”

​यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि शासन की योजनाएं अगर सही नीयत और तत्परता से काम करें, तो जमीन पर बैठे आखिरी व्यक्ति के जीवन में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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