जशपुर / कुनकुरी | 31 जुलाई 2026
कुनकुरी विकासखंड को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा के निर्देशन तथा जिला नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद रात्रि के मार्गदर्शन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुनकुरी के सभागार में ‘एनीमिया मुक्त भारत’ कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय सघन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के. कुजूर की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण में विकासखंड के चिकित्सा अधिकारियों और लैब तकनीशियनों ने भाग लिया।
जांच, उपचार और व्यवहार परिवर्तन पर रहा मुख्य जोर
प्रशिक्षण सत्र के दौरान मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अभिषेक गुप्ता ने एनीमिया के मुख्य कारणों, लक्षणों, सटीक जांच पद्धतियों, उपचार, सतत निगरानी और परामर्श पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि एनीमिया को मात देने के लिए केवल दवा देना ही काफी नहीं है, बल्कि समुदाय में खान-पान और जीवनशैली से जुड़े व्यवहार परिवर्तन (Behavior Change) पर काम करना बेहद ज़रूरी है।
डॉ. गुप्ता ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गंभीर (Severe), मध्यम (Moderate) और संवेदनशील (Vulnerable) वर्ग के मरीजों की पहचान कर विशेष प्राथमिकता दी जाए। रक्त नमूना संग्रहण से लेकर रिपोर्ट आधारित सटीक इलाज मुहैया कराने के समस्त तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से संवाद किया गया।
अगस्त महीने में 51 पंचायतों में आयोजित होंगे विशेष कैंप
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. के. कुजूर ने बताया कि यह अभियान स्वास्थ्य विभाग और ‘बहार फाउंडेशन’ के साझा प्रयासों से संचालित किया जा रहा है, जो ग्रामीण अंचल के लिए काफी जन-उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
“आगामी अगस्त महीने में कुनकुरी विकासखंड की सभी 51 पंचायतों में वृहद स्तर पर एनीमिया जांच और उपचार शिविरों का आयोजन किया जाएगा। शिविरों के सफल और सुचारू क्रियान्वयन के लिए सभी स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।”
— डॉ. के. कुजूर, खंड चिकित्सा अधिकारी, कुनकुरी
25 हजार लोगों की हो चुकी है जांच, जागरूकता अभियानों से बदली तस्वीर
प्रशिक्षण के दौरान मैदानी स्तर पर कार्यरत ‘सेहत साथियों’ की भूमिका और जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जमीनी स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं:
- जांच की स्थिति: अब तक क्षेत्र के 25,000 से अधिक लोगों का हीमोग्लोबिन (Hb) टेस्ट पूरा किया जा चुका है।
- जन-जागरूकता पहल: समूह बैठकों और घर-घर (परिवार) भ्रमण के जरिए लोगों को एनीमिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
- सृजनात्मक प्रचार: गांव-गांव में दीवार लेखन, नुक्कड़ नाटक, जिंगल प्रसारण, माइक से मुनादी और पोस्टर के माध्यम से संदेश घर-घर पहुंचाया जा रहा है।
