जशपुरनगर (22 जुलाई 2026): आकाशीय बिजली की चपेट में आने से अपने पति को खो चुकी पीड़िता के लिए ‘मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया’ संकट की घड़ी में बड़ा संबल बनकर उभरा है। लंबे समय से अटके मुआवजा प्रकरण पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल पर प्रशासन ने आवेदिका के बैंक खाते में 4 लाख रुपये की सहायता राशि जमा करा दी है।
लंबे समय से भटक रही थीं मुनिका बाई
जानकारी के अनुसार, ग्राम झरन (मसरिघाट), पोस्ट घुमरा (तहसील तपकरा) की निवासी मुनिका बाई विश्वकर्मा के पति की आकाशीय बिजली गिरने से असामयिक मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा था।
तमाम कागजी प्रक्रियाओं के बावजूद पीड़िता को काफी समय तक शासन की ओर से मिलने वाली मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हो सकी थी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया पहुंचकर अपनी समस्या बताई और राहत की गुहार लगाई।
आवेदन मिलते ही एक्शन मोड में आया प्रशासन
मुनिका बाई का आवेदन प्राप्त होते ही बगिया स्थित कैंप कार्यालय ने राजस्व एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए प्रकरण का तुरंत निराकरण किया और स्वीकृत 4 लाख रुपये की राहत राशि सीधे आवेदिका के बैंक खाते में हस्तांतरित (डीबीटी) करवा दी।
पीड़ित परिवार ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
बैंक खाते में मुआवजा राशि पहुंचते ही पीड़िता और उनके परिजनों के चेहरे पर राहत नजर आई। मुनिका बाई और उनके स्वजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और बगिया कैंप कार्यालय के प्रति आभार प्रकट किया।
“पति के चले जाने के बाद परिवार के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट था। दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तब बगिया कैंप कार्यालय में गुहार लगाई। यहाँ हमारी सुनवाई इतनी तत्परता से होगी और सीधे खाते में पैसे आ जाएंगे, इसकी उम्मीद नहीं थी।”
— मुनिका बाई (पीड़िता)
आमजन के भरोसे का केंद्र बना ‘बगिया कैंप कार्यालय’
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया अब जशपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए जनसमस्या निवारण का एक सशक्त और पारदर्शी माध्यम बन चुका है। स्वास्थ्य सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन से लेकर प्रशासनिक मामलों तक, यहाँ आने वाले हर आवेदन का त्वरित और समयबद्ध निराकरण किया जा रहा है।
