जशपुरनगर (25 जुलाई):
जल सुरक्षा को पुख्ता करने और गिरते भू-जल स्तर को सुधारने की दिशा में जशपुर जिले का बगीचा विकासखंड एक नजीर बनकर सामने आया है। ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण’ के अंतर्गत चलाए जा रहे ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान के तहत ग्राम पंचायत घोघर में 3,000 वाटर एब्जॉर्प्शन टैंक (जल अवशोषण खड्डे) का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशों के अनुरूप और कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में शुरू किया गया यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। वर्षा जल संचयन की इस तकनीक से घोघर गांव अन्य पंचायतों के लिए जल प्रबंधन का प्रेरणादायी मॉडल बन गया है।
भू-जल स्तर में सुधार और फसलों को मिलेगी नई जिंदगी
वर्षा ऋतु के दौरान हर साल लाखों लीटर पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था। घोघर में बने ये 3,000 एब्जॉर्प्शन टैंक बारिश के पानी को सीधा जमीन के भीतर समाहित (Recharge) करने का काम कर रहे हैं।
इसके प्रमुख फायदे:
- मिट्टी में नमी: खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी।
- सिंचाई सुविधा: किसानों को सूखे या कम बारिश के दौरान भी सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
- पर्यावरण संतुलन: प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनरोद्धार होगा और क्षेत्र में जल संकट का खतरा कम होगा।
जनभागीदारी से बना सफलता का मॉडल
यह अभियान सिर्फ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। स्थानीय लोगों ने जल संरक्षण के महत्व को समझा और खुद श्रमदान व सहयोग देकर इन टैंकों का निर्माण सुनिश्चित किया।
मुख्य बिंदु: घोघर की यह सफलता यह साबित करती है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनभागीदारी का सही मेल हो, तो ग्रामीण आजीविका और जल सुरक्षा दोनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है।
