रायपुर/जगदलपुर:
अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके 11 वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने बस्तर संभाग का दौरा कर क्षेत्र में आए ऐतिहासिक बदलावों को करीब से देखा। शांति, सुरक्षा, विश्वास और बुनियादी ढांचे के विकास से रूबरू होने के बाद इन पूर्व प्रशासकों ने एक स्वर में कहा कि बस्तर अब संघर्ष के साए से निकलकर एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरे देश के अग्रणी संभागों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
बस्तर प्रवास पर पहुंचे इस दल में पूर्व आईएएस अधिकारी बी.एल. कुरिल, रेणु तिवारी, मनोहर दुबे, सुरेन्द्र उपाध्याय, एस.एन. रूपला, भरत अग्रवाल, टी.सी. महावर, डी.डी. सिंह, जयश्री कियावत, सुनीता त्रिपाठी और उल्हास तेलंग शामिल रहे।
चित्रकोट और तीरथगढ़ की सुंदरता ने मोहा मन
अधिकारियों ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात और तीरथगढ़ जलप्रपात सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बस्तर केवल खनिज और वनों से ही नहीं, बल्कि अद्भुत लोक परंपराओं, समृद्ध कला-संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। सुरक्षा और शांति का माहौल बनने से अब बस्तर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
मेहनतकश लोग ही हैं बस्तर की असली ताकत
ग्रामीण अंचलों का दौरा करने के बाद पूर्व अधिकारियों ने कहा कि बस्तर के लोग बेहद सरल, सहज और कर्मठ हैं। कई दशकों की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय समुदाय ने अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा। अधिकारियों ने रेखांकित किया कि स्थानीय लोगों की मेहनत और सांस्कृतिक गौरव ही बस्तर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की सबसे बड़ी ताकत है।
मां दंतेश्वरी के दर्शन किए, अमर वाटिका में शहीदों को नमन
दल ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर अंचल की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर अधिकारियों ने कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले सुरक्षा बलों के शहीद जवानों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जवानों के त्याग और शौर्य की बदौलत ही आज बस्तर में निर्भीक वातावरण तैयार हुआ है।
‘पण्डुम कैफे’ में पुनर्वासित युवाओं से संवाद, कमिश्नर ने जताया आभार
जगदलपुर के पण्डुम कैफे में अधिकारियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने युवाओं के नए संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि स्वावलंबन और सम्मान का जीवन ही उज्ज्वल भविष्य की राह तय करता है। इस दौरान बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह ने पूर्व आईएएस अधिकारियों से मुलाकात कर बस्तर आगमन और स्थानीय लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने माओवाद के खात्मे और शांति बहाली को ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए कहा कि भयमुक्त माहौल में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार की नई राहें खुली हैं।
