सहकार से समृद्धि: जशपुर की महिलाओं ने बेचे 36 लाख के उत्पाद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ से नवाजा

छत्तीसगढ़ में ‘सहकार से समृद्धि’ का संकल्प अब जमीन पर रंग लाने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। जशपुर जिले के एक छोटे से वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने करीब 36 लाख रुपये के विभिन्न उत्पादों का विक्रय कर आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख दी है।

​महिलाओं की इस असाधारण सफलता पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विगत दिवस इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के ‘कृषि मंडपम’ में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन में उन्हें ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ और लाभांश राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह गरिमामय कार्यक्रम भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सहकारी सप्ताह (29 जून से 6 जुलाई) के तहत आयोजित किया गया था।

​10 महिलाओं की मेहनत, 36 लाख का टर्नओवर

​जशपुर जिले में वन विभाग के मार्गदर्शन में पंचक्की में ‘वन धन विकास केंद्र’ का संचालन किया जा रहा है। यहाँ ‘अनंत समूह’ नाम के महिला स्व-सहायता समूह में मात्र 10 महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर मिलने वाली जड़ी-बूटियों से उच्च गुणवत्ता वाला च्यवनप्राश और अन्य औषधीय उत्पाद तैयार किए।

सफलता के आंकड़े: इन महिलाओं ने शुद्धता और गुणवत्ता को अपनी ताकत बनाया। इसके दम पर आयुष विभाग सहित खुले बाजार में साल 2024 से 2025 के बीच कुल 36 लाख रुपये की सामग्रियों का रिकॉर्ड विक्रय किया।

​सहकारिता से बदल रही है आदिवासियों और किसानों की तकदीर

​सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है।

​मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा:

  • डबल इंजन का फायदा: छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार सहकारिता के जरिए किसानों, वनवासियों और ग्रामीण महिलाओं की आय दोगुनी करने के लिए लगातार काम कर रही है।
  • हर पंचायत तक पहुंच: प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता के लाभ से वंचित न रहे, इसके लिए राज्य में रिकॉर्ड 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
  • खेती से आगे विस्तार: केंद्र सरकार अब सिर्फ कृषि ही नहीं, बल्कि पशुपालन, डेयरी, वनोपज और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है।

​श्वेत क्रांति की ओर बढ़ते कदम

​मुख्यमंत्री ने इस बात का भी विशेष उल्लेख किया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से छत्तीसगढ़ में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक बदलाव दिखने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को ग्रामीण आय का मुख्य जरिया बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में इन सहकारी समितियों और महिला समूहों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *