जशपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) अब प्रदेश के अंतिम छोर तक असर दिखा रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान 2026’ के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना को धरातल पर उतारते हुए जशपुर जिले में 2 लाख 69 हजार 20 राशनकार्डधारी परिवारों तक हर महीने नियमित और पारदर्शी तरीके से खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।
जिले के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ सुदूर वनांचल और पहाड़ी इलाकों में भी राशन वितरण की आधुनिक व्यवस्था मजबूती से काम कर रही है। जिले की सभी 501 उचित मूल्य दुकानों को ई-पॉस (e-POS) मशीनों से लैस किया गया है, जहां राशनकार्ड से जुड़े सदस्यों के बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही खाद्यान्न जारी होता है। इस डिजिटल व्यवस्था से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि पात्र हितग्राहियों को उनके हक का पूरा राशन मिलना सुनिश्चित हुआ है।
2.52 लाख बीपीएल परिवारों को सीधा संबल
खाद्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जशपुर जिले में वर्तमान में कुल 2,69,020 राशनकार्डधारी परिवार पंजीकृत हैं। इनमें 2 लाख 52 हजार 419 परिवार गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी में आते हैं, जबकि 16 हजार 601 परिवार एपीएल श्रेणी के हैं। सभी श्रेणियों के हितग्राहियों को सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता के अनुसार तय समय पर खाद्यान्न मुहैया कराया जा रहा है, जिससे वनांचल क्षेत्र में पोषण और खाद्य सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार हुआ है।
वनांचल और दूरस्थ गांवों तक सीधी पहुंच
जिले की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 501 राशन दुकानों का नेटवर्क इस तरह तैयार किया गया है कि ग्रामीणों को खाद्यान्न लेने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। परिवार के मुखिया या कार्ड में दर्ज किसी भी सदस्य के सत्यापन से राशन मिलने की सुविधा ने व्यवस्था को बेहद सुगम बना दिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा न केवल जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि समर्थन मूल्य पर धान और मक्का उपार्जन की तैयारियां भी सुव्यवस्थित की जा रही हैं। तकनीक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ धरातल पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।